Sunday, February 3, 2008

आडवाणी जीः ठाकरे का हाथ या यूपी-बिहार का साथ...?

चुप क्यों हो आडवाणी जी....

लाल किशनचंद आडवाणी जी,
प्रणाम

नेताओं से चकमक आपकी पूरी भारतीय जनता पार्टी में बस आप ही मेरी पसंद के नेता हैं. सारे देश को अटल जी पसंद हैं, बेहद पसंद हैं. मुझे नहीं.


आप जब कट्टर थे, तब भी पसंद थे. अब उदार हो गए हैं, तब भी पसंद हैं. पसंद पार्टियों और स्टैंड की तरह बदली नहीं जा सकतीं.

नेता होने से ज्यादा साहस, गंभीरता और धैर्य की जरूरत होती है समर्थक होने में. नेताजी बदल जाते हैं, विचार बदल लेते हैं लेकिन समर्थक को साथ बने रहना होता है. नेता के हर कदम और हर बयान को सही ठहराना होता है.

संजय निरूपम शिवसेना में थे तो मुसीबत कम थी. जब से कांग्रेस में गए हैं, पूर्वांचल वालों पर पहाड़ टूट पड़ा है. महाराष्ट्र में जितने सेनानामी संगठन हैं, सचमुच बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों को देखकर सैनिकों जैसी बातें करने लगे हैं.

असम में हिंदीभाषियों को मारने वालों और महाराष्ट्र में धमकाने वालों में बहुत अंतर नहीं रह गया है आडवाणी जी.

आपको प्रधानमंत्री बनना है. इसलिए नहीं कि देश को आपकी बहुत जरूरत है. इस देश को अफसर चला रहे हैं. नेता कोई हो, देश चल जाएगा. भरोसा न हो तो अपने किसी जिलाध्यक्ष को प्रधानमंत्री बनाकर देख लीजिए. देश पाँच साल बाद भी ऐसा ही रहेगा.

आपको प्रधानमंत्री इसलिए बनना है ताकि इन निकम्मे प्रधानमंत्री महोदय से देश को मुक्ति मिले. राज्यसभा और जनपथ वाले प्रधानमंत्री जी से मुक्ति दिला दीजिए, प्लीज़.

और, अपनी सरकार में आप राज्यसभा से किसी को मंत्री भी मत बनाना. पता नहीं ये कहां-कहां से पढ़कर आते हैं. एक फैसला ऐसा नहीं करते जो वोट देने वाले आम लोगों के हित में हो. कभी जाति देख लेते हैं, कभी धर्म देख लेते हैं. एक तो टीवी और अखबारों में छपने के अलावा कुछ करते नहीं, और जब करते हैं तो तीन-पांच कर देते हैं.

वाम प्रशंसक हूं लेकिन वोट आपको ही दूंगा. सच्ची में दूंगा. वामपंथियों ने तो कांग्रेस से भी ज्यादा नर्क कर रखा है. लोगों को बेवकूफ बनाने की भी कोई सीमा होती है कि नहीं. रोज गाली भी देते हैं और जिंदा रहने की गोली भी दे आते हैं.

खैर, मैं तो यही सोचकर कांप रहा हूँ कि सरकार में रहते मोदी के सैनिकों ने मजे से जो काम कर दिया था वह तो कांग्रेसी इंदिरा जी की हत्या के बाद भी नहीं कर पाए थे. अभी तक उस पार्टी में कोई साहसी नहीं हुआ जो यह कह सके कि 84 में जो किया था, वह ठीक था.

आपके बाद यह साहस और साफगोई मोदी जी में आई है. इसलिए देश के लोग आपके बाद उन्हें ही प्रधानमंत्री मानकर चलने लगे हैं. जोशी जी से बचकर रहिएगा तो कोई दिक्कत भी नहीं होगी.

लेकिन आप ये अभी बता दीजिए कि अगले साल जब आप गठबंधन दलों के नेता के तौर पर प्रधानमंत्री बनेंगे और रेसकोर्स में रहने जाएंगे तो ये सेना वाले आपके गठबंधन में तो नहीं होंगे न.

ये जान लेना इसलिए जरूरी है कि उसके बाद इनकी हरकतों पर आप तो कुछ करेंगे नहीं तो कम से कम महाराष्ट्र में कांग्रेस की सरकार बचा ली जाए. वैसे भी विधि-व्यवस्था का मामला तो राज्य का ही काम है.

देश के लोगों का जाति या धर्म के नाम पर भड़कने और उसके भयावह नतीज़ों, दोनों के आप प्रत्यक्ष गवाह रहे हैं.

आपकी पार्टी और उसके बगलबच्चों में पहले से ही भारतीय संविधान को बिना पढ़े और दिल में उतारे कई लोग नेता बन चुके हैं. अब गठबंधन में ऐसे नेताओं को नहीं जुटा लीजिएगा. अर्जी बस यही है.

वोट तो आपको बिहार और उत्तर प्रदेश से भी लेना है. हम देना भी चाहते हैं. आपको बता दें कि हम आम चुनाव के इंतजार में बैठे हैं. लेकिन आप किसी दोयम नेता या त्रियम पार्टी से हाथ न मिला लीजिएगा जो कहते हैं कि बिहार के लोग बिहार में रहें, उत्तर प्रदेश वाले अपने राज्य में.

ऐसे राज्यप्रेमी के साथ आप चले जाएंगे तो हम देशप्रेमी आपके साथ भला कैसे रह पाएंगे. और आप उनका मनोबल बढ़ाएंगे तो क्या पता कल आपको भी कह दें कि गुजरात वाले भी भाग जाएं.

आप तो गुजरात के हैं न. मोदी जी के वोटर आपको वोट दे ही देंगे. लेकिन बिहार और उत्तर प्रदेश वाले आपके सहयोगी दलों की गाली और भभकी सुनने के लिए तो वोट देंगे नहीं.

हमारे पास वैसे भी लालू प्रसाद, राम विलास पासवान, मुलायम सिंह यादव, मायावती हैं. अपना-अपना राज्य, अपना-अपना नेता. हम इनसे काम चला लेंगे. आप अपनी सोच लीजिए. प्रधानमंत्री आपको बनना है. अगला चुनाव छह साल बाद होगा. उसे किसने देखा है.

राज ठाकरे के बयान पर केंद्र सरकार चुप है. कोर्ट में शनिवार और रविवार को छुट्टी रहती है. सोमवार को देखते हैं कि कोई जनहित याचिका आती है या नहीं. नहीं आती है तो कोई न्यायालय संज्ञान लेता भी है या नहीं.

सब चुप रहें तो रहें, आप मत चुप मत होना. आपको प्रधानमंत्री बनना है. हमें आपको वोट देना है.

अगर देश के किसी भी प्रांत के लोगों को गाली दी जाती है और आपको फर्क नहीं पड़ता है तो हमें भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि प्रधानमंत्री कौन बनता है. वैसे भी, बिहार और उत्तर प्रदेश वाले मिल जाएं तो प्रधानमंत्री तो बना ही लेंगे.

2 comments:

हर्षवर्धन said...

बहुत सलीके से जूता भिगोकर पीटा है।

रीतेश said...

हर्षवर्धन जी,
हम सबको मिलकर, जूते खोलकर, ऐसे लोगों को पीटना होगा.
भिंगोए जूतों का नेता जात पर असर ही कहां होता है. देश का विकास हुआ, न हुआ, इनकी प्रतिरोधक क्षमता जबर्दस्त तरीके से विकसित हुई है.